#4 अमावस का चाँद
" उस रात मैनें इंतजार चाँद का किया
पर दीदार सिर्फ़ तारों का हुआ ,
उस हसीन रात में एक कमी मैनें आंकी थी टिमटिमाते तारों के बीच चाँद की रोशनी बाकी थी |
उस घने काले आसमान में ,मैं हर तारे से मिला
पर चमक का फ़रिश्ता वो चाँद नहीं खिला ,
उस रात इस जहाँ को एक दीवाना फिर मिला था
जो अमावस की रात में चाँद ढूँढने निकला था ||
- मधुसूदन पंचारिया
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Superb MSP
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